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सीडी कांड के आज के फैसले से तय होगी ‘हिमाचल की सियासी दिशा’

June 2012
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शिमला. हिमाचल कांग्रेस के नेता और केंद्रीय मंत्री वीरभद्र सिंह के सियासी जीवन के लिए आज का दिन काफी अहम है। राज्य में विधानसभा चुनाव अक्टूबर में होने लगभग तय हैं, लेकिन इससे पहले उनको एक बड़ी अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा। 2009 से चल रहे सीडी कांड पर आज (सोमवार को) हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट क्या फैसला करता है? 

यह हिमाचल के पांच बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह का भविष्य निर्धारित करेगा। इस सीडी में तथाकथित तौर पर वीरभद्र, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह और कुछ अधिकारियों के बीच पैसे के लेन-देन को लेकर हुई बातचीत को रिकॉर्ड किया गया है, जिसे अभी तक वह एक राजनीतिक साजिश करार देते रहे हैं। 

साल 2009 में वीरभद्र और प्रतिभा सिंह के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया। यहां ध्यान देने वाली बात यह थी कि सीडी के रूप में मौजूद सारे सुबूत उनके राजनीतिक विरोधी विजय सिंह मनकोटिया ने उपलब्ध कराए थे। हिमाचल की बुशहर रियासत के वीरभद्र सिंह को हिमाचल के लोग ‘राजा साहब’ के नाम से पुकारते हैं। यह महज संयोग ही था कि फैसले से सिर्फ दो दिन पहले वीरभद्र सिंह ने राजनीति में अपने गोल्डन जुबली को अपने समर्थकों के साथ धूमधाम से मनाया।

आमतौर पर किसी बड़े अदालती फैसले से पहले नेता थोड़ा लो प्रोफाइल हो जाते हैं, लेकिन वीरभद्र सिंह ने ऐसा कुछ नहीं किया। जहां तक भाजपा और कांग्रेस के अंदर ही विरोधियों के सामने एक राजनीतिक स्टेटमेंट देने का सवाल है वीरभद्र तो इसमें कामयाब रहे। कांग्रेस के 23 विधायकों में से 21 वीरभद्र के साथ उनके जन्मदिन के जलसे में शामिल रहे। राज्य कांग्रेस के मुखिया कौल सिंह ठाकुर और जीएस बाली के अलावा सभी छोटे और बड़े नेता की मौजुदगी यह दर्शा रही थी कि वे अब भी कांग्रेस के अंदर सबसे ज्यादा स्वीकार्य नेता हैं।

वीरभद्र ने अपने जन्मदिन पर मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को भी आमंत्रित किया, लेकिन धूमल भला कांग्रेस के किसी राजनीतिक जलसे में कैसे आते? लेकिन, रिज मैदान में जलसे की अनुमति न मिलने की शिकायत उन्होंने बार-बार की। यह भी कहा कि धूमल का दिल बड़ा छोटा है। साथ ही वे भाजपा के अंदर चल रहे घमसान पर भी चुटकी लेते रहे। उन्होंने धूमल के विरोधी माने जा रहे शांता कुमार की खूब तारीफ की और कहा कि जब वे मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने बेहद सादगी से सरकार चलाई।

छात्र जीवन में राजनीति में कदम रखने वाले वीरभद्र देश के सबसे युवा सांसद बने, जब उन्होंने 1962 में पंडित जवाहरलाल नेहरु के कहने पर लोकसभा चुनाव लड़ा और और जीते। प्रदेश कांग्रेस फिर से एकजुट होने की कोशिश कर रही है, हालांकि पार्टी के अंदर मतभेद बरकरार हैं। 25 जून के दिन जब अदालत सजेगी तो न सिर्फ वीरभद्र सिंह, बल्कि उनके तमाम सियासी हरीफ दिल थामकर फैसले का इंतजार करेंगे।

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