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विराजो महालक्ष्मी

 

परंपरा और आस्था की जगमग रोशनी में दीपावली पर्व पर देशभर में लोग धन और समृद्धि की देवी श्री महालक्ष्मीजी के स्वागत के लिए आतुर हैं। पूरा देश कुंदन की तरह दमक रहा है। उत्साह और उल्लास के उजाले में मां लक्ष्मी हर घर सुख-समृद्धि का आशीष लेकर आएंगी। इसी उम्मीद के साथ घर-आंगन सजे-संवरे हैं। इंतजार है उस शुभ घड़ी का जब पूजन के साथ ही खुशियों के पटाखे छूटेंगे, उमंगों की लड़ियां चलेंगी।

ऐसे करें पूजन

* पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं। लक्ष्मीजी की प्रतिमा या चित्र सामने रखें।

* लाल, सफेद या पीले वस्त्र को पाट पर बिछाकर उस पर हल्दी से स्वस्तिक बना दें। इस पर चावल व पुष्पदल बिछाकर लक्ष्मीजी की स्थापना करें।

* लक्ष्मीजी के आगे गणोश जी की प्रतिमा या सुपारी रखें। लक्ष्मी जी के दाहिनी ओर कुबेर व बाईं ओर सरस्वतीजी की स्थापना करें।

* लक्ष्मीजी का पूजन हमेशा नारायण (विष्णु भगवान जी के साथ) ही करना चाहिये।

* घी का दीपक, जल, दूध, पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराकर वस्त्र, चंदन (केशर), अक्षत, पुष्प (कमल, मोगरा, गुलदावदी, गेंदा,) अर्पण करें।

* आंवला, कमलगट्टा, सिंगाड़े, सीताफल, अनार, सेव, ईख आदि अर्पण करते हुए मिष्ठान्न व विभिन्न व्यंजन बनाकर नैवेद्य लगाएं।

* घी की बत्ती से आरती करें, तदनंतर प्रार्थना करते हुए पटाखे छोड़ें।

ऐसे स्थिर होगी लक्ष्मी

जो आस्तिकजन लक्ष्मी की स्थिरता चाहते हैं उन्हें सायंकाल ६.१९ से ८.१७ के बीच लक्ष्मी का स्थिर लग्न में पूजन करना चाहिए। पूजन में आंवला, साल की धानी व ईख विशेष रूप से होना चाहिये। लक्ष्मी के प्रतीक चांदी के सिक्कों का पूजन कर हल्दी, कंकू चढ़ा चित्र के दाहिनी ओर लाल या पीले वस्त्र में स्वस्तिक बना चांदी के सिक्कों को रखें तथा पूजनोपरांत उन्हें उन्हीं वस्त्र में लपेटकर अपने कपाट (आलमारी) में रखें। लक्ष्मी की स्थिरता बनेगी तथा लंबे समय तक उसका उपभोग कर सकेंगे।

धन की स्थिरता

यदि संचित राशि शीघ्र ही अन्य मदों में खर्च हो जाती है तो उसे आस्तिकजन इस दिन सायंकाल ७.११ से ७.२४ के मध्य एक नोट की गड्डी में मौली लपेट मुलेठी, आंवला व कमल गट्टा साथ में लें, लालवस्त्र में लपेटकर सेफ में रखें, लक्ष्मी की स्थिरता बनेगी।

व्यापार में लाभ

व्यापार विनिमय में सदैव आर्थिक परेशानी रहती हो, वे पूजन स्थल पर लक्ष्मीजी के चित्र के दाहिनी ओर रक्तकमल का पुष्प रखें तथा बाईं बाजू में गोमती चक्र रखें। पूजा के बाद शुभ मुहूर्त में चांदी के सिक्कों के साथ लाल कपड़े में मुलेट, ईख के खंड व गोमती चक्र के साथ सेफ में स्थापित करें लाभ होगा।

पूजा के श्रेष्ठ मुहूर्त

किसके लिए समय क्यों दिशा

घर में संध्या 6.19 से 8.17 प्रदोषकाल ईशान कोण (पूर्वोत्तर का कोना)

व्यापारी रात्रि 8.50 से 10.27 व लाभ व श्रेष्ठ फलदायी पश्चिम दिशा में

मध्य रात्रि १२.५ से १.३९ कक्ष या मंदिर में

उद्योगपति संध्या 6.19 से रात्रि 8.17 तथा स्थिर वृषभ लग्न पश्चिम दिशा के

मध्य रात्रि 12.5 से 1.39 व श्रेष्ठ फलदायी कक्ष या पूजा घर में

किसान संध्या 6.19 से 8.17 स्थिर वृषभ लग्न पूर्व दिशा में स्थित पूजा घर में

विद्यार्थी मध्याह्न् 1.02 से1.34 व शुभ व प्रदोषकाल उत्तर दिशा में स्थित

संध्या 5.44से रात्रि 8.19 मंदिर या पूजन कक्ष में

(मुहूर्त पंडितों के मुताबिक, पूजन करने वाले अपनी परिस्थति के अनुसार समय का चयन कर सकते हैं)

दीपक का महत्व

दीपावली पर दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं। ज्योतिषाचार्य पं. आनंदशंकर व्यास के अनुसार वस्तुत: दीपावली पर दीपकों के पूजन का महत्व है। दीपक की लौ रोशनी की प्रतीक है। एक अर्थ में दीपक की रोशनी ज्ञान की प्रतीक है। ज्ञान ही सुख और समृद्धि का आधार है।

ऐसे होंगी प्रसन्न..

* दीपावली के दिन किसी गरीब सुहागिन स्त्री को सुहाग सामग्री दान दें। मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

* दीपावली के दिन नई झाड़ू खरीद लाएं। पूजा से पहले उससे थोड़ी सफाई करें फिर उसे एक तरफ रख दें। अगले दिन उसका प्रयोग करें। इससे दरिद्रता दूर होगी और घर में लक्ष्मी का आगमन होगा।

* महानिशा काल (मध्यरात्रि १२ से २ बजे तक का समय) में लक्ष्मीजी के मंत्रों का जप करने से लक्ष्मी की प्रसन्नता से धन की प्राप्ति होती है।

* आर्थिक स्थिति में उन्नति के लिए दीपावली की रात सिंह लग्न में श्रीसूक्त का पाठ करें।

* दक्षिणावर्ती शंख, मोती शंख, कुबेर पात्र, गोमती चक्र घर में रखें। लक्ष्मीजी की कृपा प्राप्त होगी।

* दीपक को दोनों हाथों में लेकर अपने घर के ऐसे स्थान पर आ जाएं, जहां से आकाश दिखाई देता हो। वहां मां लक्ष्मी से घर की समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। फिर दीपक को लेकर पूरे घर में घूम जाएं और अंत में उसे पूजा स्थल पर रख दें। इस प्रयोग से लक्ष्मीजी प्रसन्न होती हैं।

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अब सबसे ऊंचे शिमला के हनुमान

शिमला . जाखू पहाड़ी पर स्थापित विश्व की सबसे ऊंचाई पर स्थित हनुमान प्रतिमा के दर्शन के लिए अभिनेता अभिषेक बच्चन ने जब नजरें आसामन की ओर उठाई तो उन्हें अपनी दादी तेजी बच्चन की याद आ गई। दादी नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करती थीं। उन्हीं से अभिषेक ने वीर बजरंग बली का गुणगान सुना। अनावरण के बाद विशालकाय प्रतिमा के दर्शन के वक्त दादी की याद आना स्वाभाविक था।

दादी से मिले संस्कारों के कारण ही वे स्वयं भी नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। उन्होंने कहा, शिमला में महाबली की इतनी विशालकाय मूर्ति के दर्शन कर वह धन्य हुए। बच्चन ने कहा कि यहां वह एलओसी फिल्म की शूटिंग के लिए आए थे। फिल्म में उन्होंने हिमाचल के वीर सपूत विक्रम बतरा का किरदार अदा किया था।

उनका कहना है कि अगली बार जब भी वह शिमला आएंगे तो सपरिवार आएंगे। राजनीतिक अपने संबंधी प्रश्न पर अभिषेक ने कहा कि तौबा-तौबा, राजनीति में आने का उनका इरादा नहीं है। कि वह भगवान से कुछ नहीं मांगते, जो वे देते हैं उसे सहर्ष स्वीकार करते हैं।

अभिषेक ने कहा, जाखू आने पर उन्हें हनुमानजी की शक्ति का अहसास हुआ। जब नंदा ट्रस्ट की ओर से उन्हें जाखू आने का न्यौता मिला तो कार्यक्रम खुद वह खुद इस तरह से बन गया कि वह यहां खिंचे चले आए।

उनकी चाह हिमाचल में अपना आशियाना बनाने की भी है। क्या आप हिमाचल के ब्रांड एंबेडसर बनना चाहेंगे इस पर अभिषेक का कहना था अगर प्रदेश सरकार इसके लिए न्यौता देगी तो वह जरूर काम करना चाहेंगे। उन्होंने दिसंबर में रिलीज हो रही फिल्म ‘क्रांतिकारी’ के बारें में भी जानकारी दी। अभिषेक ने प्रशंसकों को दिवाली की शुभकामनाएं भी दी। अभिषेक बच्चन जाखू में दुनिया की सबसे ऊंचाई पर स्थित 108 फीट ऊंची प्रतिमा का लोकार्पण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अथिति उपस्थित हुए थे। प्रतिमा के लोकार्पण के बाद उन्होंने पत्रकारों से चर्चा भी की।

प्रेसवार्ता के दौरान मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल भी मौजूद थे। करीब दो घंटे शिमला में बिताने के बाद दोपहर एक बजे अभिषेक बच्चन जुब्बड़हटटी हेलीपेड से चाटर्ड विमान से दिल्ली रवाना हुए। मूर्ति लोकार्पण समारोह में अभिषेक की बहन श्वेता नंदा, अभिनेता परिक्षित साहनी, नंदा ट्रस्ट के एसची चंदा, जेएचएस के निखिल नंदा भी मौजूद थे

विश्व में सबसे ऊंची और ऊंचाई पर है स्थित है प्रतिमा : हनुमान जयंती पर वीरवार को जाखू में 8050 फुट की ऊंचाई और 108 फुट ऊंची भगवान हनुमान की प्रतिमा लोकार्पण किया गया। दिल्ली के एचसी नंदा ट्रस्ट की ओर से बनाई गई इस प्रतिमा ने सबसे ऊंचाई और सबसे ऊंची होने का खिताब आसिल कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। इस प्रतिमा ने अपने वर्ग में रियो डी जिनेरियो, ब्राजील में 2296 फुट की ऊंचाई पर स्थित 98 फुट ऊंची ईसा मसीह की प्रतिमा का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है।

प्रतिमा पर नहीं बैठ पाएगा कोई पक्षी या बंदर

जाखू स्थित 108 फुट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा पर कोई बंदर या पक्षी न बैठे। इसके लिए मूर्ति पर दो ‘बर्ड चेजर’ की मशीनें लगाई गई हैं। यह मशीन अल्ट्रासोनिक तरंगें छोड़ती है जिससे विशेष प्रकार की आवाज होती है। आवाज होने पर पशु-पक्षी डर जाते हैं। यह जानकारी गुड़गांव निवासी मूर्तिकार नरेश वर्मा ने दी।

घर में होगी बरकत ऐसे

आपने बड़े-बूढ़ों को यह कहते हुए सुना होगा कि जिस घर में नमक बंधा हो, तो वहां बरकत रहती है। लक्ष्मी को कमल पर आसीन माना गया है।हल्दी की गाठों में साक्षात गणेश का रूप माना गया है और धनियां को इसलिए इस नाम से पुकारा जाता है क्योंकि वह धन का आवाह्न करता है।
कारण चाहे जो भी हो लेकिन यह बिल्कुल सही है। जिस घर में नमक, खड़ा धना, हल्दी की गांठे और कमल गट्टों को भले ही कम मात्रा में ही सही लेकिन कु छ मात्रा में संजोकर रखा जाए तो निश्चय ही उस घर में बरकत होती है। वहां शांति बनी रहती है।
साबुत नमक को पर्याप्त मात्रा में ईशान्य यानी उत्तर-पूर्व में रखने पर किसी भी विपरीत दिशा में शौचालय में रखने से उनका दोष कम हो जाता है।

पर्स हमेशा भरा रहेगा ऐसे

क्या आपके पास पैसों की बरकत नहीं रहती? पर्स अक्सर खाली रहने लगा है। यदि आप जीवन में मुश्किलों से जुझ रहे हैं, तो नीचे लिखे इस टोटके को अपनाकर कोई भी पैसों की परेशानी से निजात पा सकता हैं।
– लक्ष्मी का स्वरूप माना जाने वाला एकाक्षरी बीज मंत्र ह्रीं बहुत प्रभावशाली और चमत्कारी है।
– किसी भी शनिवार के दिन सुबह स्नान आदि से निपट कर शनि की होरा में एक साबुत पीपल का पत्ता तोड़कर ले आएं।
– मन में ऊं नमो: नारायण मंत्र का जप करते रहे।
– फिर उस पत्ते को गंगाजल या किसी तीर्थ स्थल के जल से धोकर उस पर अष्टगंध की स्याही से अपने हाथ की अनामिका अंगुली से ह्रीं लिख लें।
– उसके बाद धूप-दीप करने के बाद उक्त पत्ते को नये पत्ते से बदल लें।
– पुराने पत्ते को किसी बहते जल में प्रवाहित कर दें। नये पत्ते को आप अपनी दुकान आदि में पैसे रखने के स्थान पर या जेब में पर्स भी रख सकते हैं।
– विशेष ध्यान यह रहे कि पत्ता नीचे रखें।

World’s tallest statue to be unveiled today

Shimla, November 3
The idol of Lord Hanuman, all set to become the world’s tallest statue at a height of 6,880 feet, will be unveiled here tomorrow in the presence of Bollywood star Abhishek Bachchan.

The 108-feet idol of Lord Hanuman, at the Jakhu temple, atop a hill will be formally unveiled here tomorrow by Chief Minister PK Dhumal. The idol has been set up by JHS Svendgaard Laboratories Ltd, the country’s largest oral care products manufacturer. Junior Bachchan is likely to be accompanied by his sister Shweta, who is married into the Nanda family.

The idol will surpass the tallest statue of “Christ the Redeemer” measuring 98 feet at a height of 2,296 feet in Rio de Janerio in Brazil. The idol is being set up the HC Nanda Trust, the philanthropic wing set up by the company, which also facilitates socially-oriented programmes for the upliftment of economically weaker sections of society.

Having deep reverence towards Lord Hanuman, the setting up of the statue is an expression of their deep faith and devotion towards “Sankatmochan”.

अभिषेक करेंगे हनुमान की मूर्ति का लोकार्पण

 

शिमला . राजधानी के जाखू में सबसे ऊंचाई पर स्थित हनुमान जी की 108 फुट ऊंची प्रतिमा के लोकार्पण की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। हनुमान जयंति के मौके पर वीरवार को जाखू में सुबह आठ बजे से भजन कीर्तन का कार्यक्रम शुरू हो जाएगा।

इस दौरान दिल्ली से विशेष भजन मंडली अपनी प्रस्तुति देगी। मूर्ति का लोकार्पण सुबह साढ़े 11 बजे किया जाएगा। यह प्रतिमा ब्राजील में 2296 फुट उंचाई पर स्थित 98 फुट ऊंची प्रतिमा से विशाल और ज्यादा ऊंचाई पर है।

सुबह दस बजे मीडिया के प्रतिनिधियों का पंजीकरण और अराइवल होगा। इसके बाद साढ़े दस बजे अभिनेता अभिषेक बच्चन कार्यक्रम में पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल 10:35 पर कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। इसके बाद 10:40 पर जेएचएस के प्रबंध निदेशक निखिल नंदा की ओर से स्वागत भाषण होगा और अतिथियों का स्वागत किया जाएगा।

मूर्ति पूजा का शुभारंभ और प्रतिमा का अनावरण पौने 11 से लेकर साढ़े 11 बजे तक होगा। कार्यक्रम के दौरान स्कूली बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत करेंगे। करीब 11:35 पर अभिषेक बच्चन उपस्थित लोगों को संबोधित करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल जनता को संबोधित करेंगे।

11:45 पर अभिषेक बच्चन एक प्रेस वार्ता में साक्षात्कार देंगे। मंगलवार शाम को जिला प्रशासन, पर्यटन निगम और पुलिस प्रशासन में सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधों का जायजा लिया। इस मौके पर नंदा ट्रस्ट के अधिकारी भी मौजूद थे। जाखू मंदिर में हनुमान जयंति के मौके पर जाखू मंदिर सचिवालय सेवा समिति की ओर से भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

अभिषेक राज्य अतिथि घोषित

राज्य सरकार ने अभिषेक बच्चन को राज्य अतिथि घोषित किया है। अभिषेक बच्चन पीटरहॉफ में दोपहर का भोजन करके वापस लौट जाएंगे। अभिषेक के शिमला दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जाखू जाने वाले रास्ते के चप्पे चप्पे पर पुलिस का पहरा रहेगा।

धनतेरस शुद्ध धातु का निवेश जरूरी भगवान धनवंतरि उसे वर्ष भर में कर देते हैं दुगुना।

पूजन

 

विधि

शुभ मुहूर्त में अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठान में नई गादी बिछाएं अथवा पुरानी गादी को ही साफ कर फिर से स्थापित करें। इसके बाद नवीन बसना बिछाएं। सांयकाल पश्चात तेरह दीपक प्रज्वलित कर तिजोरी में कुबेर का पूजन करते हैं।

 

धनतेरस

पूजन से मिलता है अकाल मृत्यु से छुटकार

एक बार यमराज ने अपने दूतों से प्रश्न पूछा कि क्या जीवों के प्राण लेते समय तुम्हें किसी पर दया आती है। इस प्रश्न पर यमदूतों ने कहा कि नहीं, हम तो केवल आपकी आज्ञा का पालन करते हैं। यमराज ने दुबार पूछा कि निर्भय होकर प्रश्न का उत्तर दो। तब यमदूतों ने बताया कि एक बार हमारा हृदय कांप उठा था।

यमदूतों ने बताया कि एक बार राजा हेम की पत्नी ने एक पुत्र को जन्म दिया। लेकिन ज्योतिषियों ने बताया कि बालक विवाह के चार दिन बाद मर जाएगा। यह सुनने के बाद राजा हेमा ने स्त्रियों के सान्ध्यि से बालक को बचाने के लिए उसे एक गुफा में ब्रह्मचारी रूप में रखा। कुछ समय पश्चात राजा हंस की बेटी यमुना के तट पर पहुंच गई और उस बालक ने उससे गंधर्व विवाह कर लिया। लेकिन होनी को कौन टाल सकता है। विवाह के चौथे दिन वह राजकुमार मृत्यु को प्राप्त हुआ। उन दोनों की जोड़ी अत्यंत खूबसूरत थी और वे दोनों कामदेव और रति से किसी भी प्रकार कम नहीं थे।

अत्यंत दुखी मन से यमदूतों ने यमराज से कहा कि उस राजकुमारी का रु विलाप सुनक हमारा हृदय कांप गया। यह हानी सुनक यमराज अत्यंत दुखी हुए। तभी एक यमदूत ने यमराज से अकाल मृत्यु से बचने का उपाय पूछा। यमराज ने कहाधनतेरस के पूजन दीपदान को विधिपूर्वक रने से अकाल मृत्यु से छुटकारा मिलता है। जिस घर में यह पूजन होता है, वहां अकाल मृत्यु का भय पास भी नहीं टक ता। इसी घटना से धनतेरस के दिन धन्वन्तरि पूजन सहित दीपदान की प्रथा का प्रचलन शुरू हआ।

नए

पात्र का पूजन

धनतेरस के दिन नए बर्तन खरीदने की परंपरा है। प्राचीन मान्यता के अनु सार एक बार देवयुग में (देवों के जन्म से लेकर महाभारत युद्घ के पूर्वकाल) देवों ने अमरत्व हासिल करने की कोशिश की। उस समय देव, मनुष्य, दानव, असुर, सुपर्ण, कि न्नर, गंधर्व, वानर और नाग कु में विभाजित मानव एक साथ रहते थे। यह निर्णय हुआ सभी मिलकर समुद्र मंथन करें।

मंथन से पहले समुद्र में विभिन्न औषधियां लाकर डालीं। फिर मंथन किया गया। इससे सोमरस चारों तरफ फैल गया। इसके अलावा अमृतरूप सुवर्ण से अमृत का फव्वारा फूट पड़ा। उस अमृत को भगवान धन्वंतरि ने एक लश में एकत्र कर लिया और प्रकट हो गए। इसलिए बाजार से नए बर्तन खरीदकर उनमें पक वान रखकर भगवान की तस्वीर के सामने रखे जाने की परंपरा है। इसके साथ ही भगवान धन्वंतरि का स्मरण करते हुए नए पात्र का पूजन कि या जाता है।

धन तेरस यानी आम भाषा में खरीदारी का त्योहार। इस दिन लोग जमकर खरीदारी करते हैं। महिलाएं खास तौर पर बर्तन खरीदती है। बर्तन खरीदने की परंपरा काफी समय से चली रही हैं लेकि इसके पीछे की भावना कम ही लोगों को मालूम है। इस दिन नए पात्र खरीद कर, उसमें पूजोजित पक वान रखकर भगवान धन्वंतरि को भोग लगाया जाता है। पात्र ही नहीं सोना चांदी खरीदकर भी उनके रूप में भगवान धन्वंतरि का पूजन किया जाता है। तभी तो इस दिन बाजार बर्तनों से अटे रहते हैं। लोग शगुन के तौर पर कुछ कुछ जरूर लेते हैं। सोने चांदी के जवाहरातों की खरीद का भी इस दिन काफी महत्व होता है। कहते हैं कि इस दिन खरीदे जाने वाले पात्र और जवाहरात संपत्ति में वृद्घ कराते हैं।

शुद्ध

धातु का निवेश जरूरी भगवान धनवंतरि उसे वर्ष भर में दुगुना कर देते हैं।

ऐसी मान्यता है कि धनतेरस के दिन शुद्ध धातु में निवेश अवश्य रना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि जितना अधिक शुद्ध धातु में निवेश किया जाता है भगवान धनवंतरि उसे वर्ष भर में दुगुना कर देते हैं। इस दिन बड़े पैमाने पर शुद्ध धातु यानि कि सोनेचांदी के सिक्के, सोने के बिस्कुट सोने की ईंटों पर जमकर निवेश किया जाता है।

धनतेरस को लेकर एक माह पहले से सोने और चांदी के सिक्कों की डिमांड शुरू हो जाती है। सभी ज्वैलर्स बहुत पहले से ही तैयारियों में जुट जाते हैं। बड़ीबड़ी कारपोरेट कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को दीवाली के तोहफे के रूप में सोने के सिक्के देती हैं। करीब एक महीने पहले से ही कंपनियां सिक्कों का आर्डर देने लगी हैं। धनतेरस पर सोना या चांदी खरीदने में लोगों की दिलचस्पी को देखते हुए ज्वैलर्स के लिए भी यह सबसे बड़ा आयोजन होता है। ऐसे में सभी वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर हर तरह के सिक्के बनाए जाते हैं। बाजार में एक ग्राम से लेकर 50 ग्राम तक के सोने के सिक्के मौजूद हैं।

सोनाचांदी के सिक्कों के अलावा इस दिन बिस्कुट और ईंट खरीदने वाले भी कम नहीं। धनतेरस के मौके पर सोने के सिक्के तो खूब बिकते हैं, लेकिन बिस्कुट और ईट खरीदने वाले भी कम नहीं है। कई लोग इस मौके पर सोने की ईंट खरीदते हैं। एक किलो वजन की ईट भी बाजार में है।

 

 

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